Monday, 19 February 2018
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राजनीति से औधौगिक घराने की दोस्ती कानून पर भारी पड़ जाती है?
नमस्कार , लेख को विस्तृत न करते हुए केवल सारांशिक वेल्यू में समेटते हुए मै भारतीय राजनीत के बदलते हुए परिवेश और उसकी बढ़ती नकारात्मक शक्ति ...
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गीत सुना जाता हूँ टूटे हुए स्वर सूखे लुटे अधर मुफ़्त के ही कूचों में उलझे है सरासर खुली वात से स्वयं टकरा जाता हूँ गीत सुना ...
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उषा के सीने से बाल रवि चरकर बाहर है निकल आया कहीँ धुप थोड़ी पड़ी तो कही शीतल छायाँ में आराम करने आया झोकों में बहती अनिल रूककर पुनः चल पड़...
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दोपहर की धुप खिली है निवास के भीतर भाप चली है दोपहर की धुप खिली है लम्बी गलियोँ तक दृष्टि देखे कोई गलती से भी न दिखे दोपहर की धुप खिली...
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